जाति और धार्मिक पहचान पर 1881 की जनगणना का प्रभाव

जाति और धार्मिक पहचान पर 1881 की जनगणना का प्रभाव उत्तर – जनगणना देश के लोगों की एक आधिकारिक गणना और अन्य चीजों के बीच आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, लैंगिक और साक्षरता से संबंधित आंकड़ों का एक सांख्यिकीय संकलन है। भारत में पहली जनगणना, हालांकि सीमित रूपों में 1872 में की गई थी उसके बाद पहली … Read more

मजदूर वर्ग और राष्ट्रीय आंदोलन

मजदूर वर्ग और राष्ट्रीय आंदोलन (64वीं BPSC/2019 ) उत्तर – भारतीय श्रमिक वर्ग रेलवे, कोयला, कपास और जूट उद्योगों के निर्माण के परिणामस्वरूप उभरा। भारतीय मजदूर वर्ग को दो बुनियादी विरोधी शक्तियों का सामना करना पड़ा – एक विदेशी साम्राज्यवादी राजनीतिक शासन और दूसरा – देशी पूँजीपति वर्ग, दोनों के हाथों आर्थिक शोषण । राष्ट्रीय … Read more

19वीं सदी के ब्रिटिशकालीन भारत में समुद्र पारयिता पारंगत के क्या कारण थे? बिहार के विशेष संदर्भ में इन्डेन्च पद्धति के आलोक में विवेचना कीजिए।

19वीं सदी के ब्रिटिशकालीन भारत में समुद्र पारयिता पारंगत के क्या कारण थे? बिहार के विशेष संदर्भ में इन्डेन्च पद्धति के आलोक में विवेचना कीजिए। (64वीं BPSC/2019 ) अंग्रेजों के भारत पर पूर्ण अधिकार प्राप्त कर लेने के बाद भारतीय संसाधनों के दोहन और उनका निर्गमन के लिए अधिकाधिक मजदूरों की आवश्यकता की पूर्ति हेतु … Read more

19वीं सदी के उत्तरार्ध से भारतीय राष्ट्रवाद के विकास की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए।

19वीं सदी के उत्तरार्ध से भारतीय राष्ट्रवाद के विकास की आलोचनात्मक समीक्षा कीजिए। ( 64वीं BPSC/2019 ) अथवा ‘राष्ट्रवाद’ को परिभाषित करते हुए अंग्रेजों के भारत पर पूर्ण आधिपत्य के उपरांत उनके अत्याचार पूर्ण आर्थिक शोषण एवं दोहनवादी नीतियों के कारण भारतीयों में उत्पन्न असंतोष और विद्रोह को उद्घाटित कीजिए।  अथवा पाश्चात्य शिक्षा से भारतीयों … Read more

बिहार में दलित आन्दोलन

बिहार में दलित आन्दोलन उत्तर- अरस्तू ने कहा था- “असमानता क्रान्ति की जड़ है । ” विश्व में जितनी भी लड़ाइयाँ, विद्रोह एवं आंदोलन हुए हैं, उनमें से अधिकतर समानता और स्वतंत्रता के लिए हुए हैं। इतिहास का कोई ऐसा युग नहीं हुआ जहां जाति या वर्णव्यवस्था के विरूद्ध कोई विद्रोह अथवा आंदोलन न हुआ … Read more

जाति और धर्म पर गाँधीजी के विचार

जाति और धर्म पर गाँधीजी के विचार उत्तर– गाँधीजी के वर्ण अथवा जाति पर विचार- गाँधीजी का सत्यप्रयास विश्व मानवता के लिए था, जहाँ किसी जाति-वर्ग अथवा नस्ल के प्रति घृणा का स्थान नहीं है, सबों के लिए सत्य, प्रेम और करूणा ही आदर्श है। भारत गुलाम क्यों बना, इसके कारणों की खोज करते हुए … Read more

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रीय आन्दोलन

डॉ. राजेन्द्र प्रसाद और राष्ट्रीय आन्दोलन उत्तर– डॉ. राजेंद्र प्रसाद स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति थे। राष्ट्र के लिए उनका योगदान बहुत गहरा है । वह जवाहरलाल नेहरू, वल्लभभाई पटेल और लाल बहादुर शास्त्री के साथ भारतीय राष्ट्रवादी आंदोलन के प्रमुख नेताओं में से एक थे। वह उन भावुक व्यक्तियों में से एक थे जिन्होंने … Read more

राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के सामाजिक और आर्थिक चिन्तन की व्याख्या कीजिए।

राम मनोहर लोहिया और जयप्रकाश नारायण के सामाजिक और आर्थिक चिन्तन की व्याख्या कीजिए। (65वीं BPSC/2020 ) लोहिया एवं जयप्रकाश के सामाजिक, आर्थिक स्तर पर उनके बुनियादी सोच को उद्घाटित करें। अथवा लोहिया के सामाजिक और आर्थिक असमानता को दूर करने के लिए उनके द्वारा सुझाए गए उपायों का उल्लेख करें। उत्तर – राम मनोहर … Read more

स्वामी सहजानन्द और किसान सभा आन्दोलन पर एक टिप्पणी लिखिए।

स्वामी सहजानन्द और किसान सभा आन्दोलन पर एक टिप्पणी लिखिए।  ( 65वीं BPSC/2020 ) उत्तर- बिहार में किसानों की समस्याओं के समाधान एवं उनके संगठित करने के उद्देश्य से 1923 में मुंगेर में किसान सभा का गठन किया गया। इस सभा का गठन मो. जुबैर एवं श्रीकृष्ण सिंह ने किया था। परंतु किसान आंदोलन को … Read more

1857 के विद्रोह के क्या कारण थे? बिहार में उसका प्रभाव क्या था ?

1857 के विद्रोह के क्या कारण थे? बिहार में उसका प्रभाव क्या था ? ( 65वीं BPSC / 2020 ) अथवा विद्रोह के कारणों का उल्लेख करते हुए विद्रोह के परिणाम अथवा प्रभाव को बताएं। उत्तर -1857 का विद्रोह अंग्रेजों के खिलाफ प्रथम व्यापक विद्रोह था जो काफी बड़े क्षेत्र में फैला एवं इसका नेतृत्व … Read more