‘महिला आरक्षण विधेयक’ क्या है ? आपके अनुसार यह विधेयक विधान (कानून) क्यों नहीं बन पा रहा है ?

‘महिला आरक्षण विधेयक’ क्या है ? आपके अनुसार यह विधेयक विधान (कानून) क्यों नहीं बन पा रहा है ? उत्तर- जनता की प्रतिनिधि संस्थाओं में सत्ता की साझेदारी में महिलाओं को अधिक स्थान देने के उद्देश्य से कई कदम उठाए जा चुके हैं। भारतीय संविधान के 73 वें और 74 वें संशोधन द्वारा देशभर में ग्रामीण … Read more

भ्रूण-हत्या क्या है? क्या कानून इसे रोकने में सफल हुआ है ?

भ्रूण-हत्या क्या है? क्या कानून इसे रोकने में सफल हुआ है ? उत्तर- भारत में अभी भी महिलाओं की स्थिति संतोषजनक नहीं है। आज भी पुत्री का जन्म शोक का विषय बना हुआ है। भ्रूण-हत्या की परंपरा स्थापित हो गई है। अत्याधुनिक उपकरणों की सहायता से गर्भ में ही शिशु (भ्रूण) के लिंग की जानकारी प्राप्त … Read more

परिवार के भीतर किस प्रकार लैंगिक भेदभाव किये जाते हैं? समझावें।

परिवार के भीतर किस प्रकार लैंगिक भेदभाव किये जाते हैं? समझावें। उत्तर- भारतीय समाज पुरुष प्रधान समाज है। परिवार में भी लड़कों को ही प्राथमिकता दी जाती है। लड़के और लड़कियों के पालन-पोषण के क्रम में परिवार में ही यह भावना पनप जाती है कि भविष्य में लड़कियों की मुख्य जिम्मेवारी गृहस्थी चलाने और बच्चों के … Read more

सामाजिक विभाजन के तीन निर्धारक तत्त्व कौन-कौन से हैं ?

सामाजिक विभाजन के तीन निर्धारक तत्त्व कौन-कौन से हैं ? उत्तर-सामाजिक विभाजन के तीन निर्धारक तत्त्व इस प्रकार से हैं I. स्वयं की पहचान की चेतना- यह इस बात को दर्शाता है कि व्यक्ति अपनी पहचान किस प्रकार बनाए रखता है किसी धर्म विशेष, जाति विशेष अथवा संप्रदाय पर आधारित। इस प्रकार के सामाजिक विभाजन के … Read more

सामाजिक विभाजनों की राजनीति का परिणाम किन-किन चीजों पर निर्भर करता है ?

सामाजिक विभाजनों की राजनीति का परिणाम किन-किन चीजों पर निर्भर करता है ? उत्तर- सामाजिक विभाजनों की राजनीति का परिणाम तीन चीजों पर निर्भर करता है। प्रथम- नागरिक अपनी पहचान स्व-अस्तित्व तक सीमित रखना चाहते हैं, क्योंकि प्रत्येक मनुष्य में राष्ट्रीय चेतना के अलावा उपराष्ट्रीय या स्थानीय चेतना भी होती है। कोई एक चेतना बाकी चेतनाओं की … Read more

हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती। कैसे ?

हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप नहीं लेती। कैसे ? उत्तर- यह कोई जरूरी नहीं कि हर सामाजिक विभिन्नता सामाजिक विभाजन का रूप ले ले। सामाजिक विभिन्नता के कारण लोगों में विभेद की विचारधारा अवश्य बनती है, परंतु यही विभिन्नता कहीं-कहीं पर समान उद्देश्य के कारण मूल का काम भी करती है। सामाजिक विभाजन एवं … Read more

परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करता है ?

परिवारवाद और जातिवाद बिहार में किस तरह लोकतंत्र को प्रभावित करता है ? उत्तर- अधिकांश राजनीतिक दल एवं उनके नेता अपने परिवार एवं सगे-संबंधियों को राजनीति में लाने का प्रयास करती है। यही राजनीति में परिवारवाद है। वास्तव म यह लोकतंत्र को प्रभावित करता है। सामान्यतः प्रत्येक चुनाव में विशेष कर टिकट बटवारे के समय ऐसी … Read more

जातिवाद क्या है ? क्या बिहार की राजनीति में जातिवाद हावी है ?

जातिवाद क्या है ? क्या बिहार की राजनीति में जातिवाद हावी है ? उत्तर- जातिवाद भारत की एक मुख्य सामाजिक समस्या माना जाता रहा है। जाति- व्यवस्था से ही समाज में ऊँच-नीच की भावना पैदा हुई। कर्म के आधार पर . विकसित जाति-व्यवस्था जन्म के आधार को गले लगा ली जिसका समाज पर बुरा । प्रभाव … Read more

जातिवाद के किन्हीं चार कुप्रभावों का उल्लेख करें।

जातिवाद के किन्हीं चार कुप्रभावों का उल्लेख करें। उत्तर- जातिवाद के निम्नांकित चार कुप्रभाव हैं – (i) समाज में रूढ़िवाद और सामाजिक कुरीतियों का विकास (ii) विभिन्न जातियों के लोगों द्वारा एक-दूसरे को अश्रद्धा एवं घृणा की दृष्टि से देखने के कारण लोगों के बीच असमानता एवं फूट की भावना में वृद्धि ।। (iii) जातिवाद के कारण राष्ट्र का … Read more

“सिर्फ जाति के आधार पर राजनीति करके चुनाव जीतना संभव नहीं”। स्पष्ट करें।

“सिर्फ जाति के आधार पर राजनीति करके चुनाव जीतना संभव नहीं”। स्पष्ट करें। उत्तर- लोकतंत्र विभिन्नता से भरा है, कभी भी जनता के बीच एक पार्टी या विचारधारा के ऊपर एक मत होना संभव नहीं हो पाता। ठीक उसी तरह किसी भी क्षेत्र में सिर्फ जाति के आधार पर राजनीति करके कोई चुनाव नहीं जीत सकता। … Read more