पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने हेतु क्या-क्या कदम उठाए गए हैं ?

पंचवर्षीय योजनाओं के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने हेतु क्या-क्या कदम उठाए गए हैं ?

> ( 39वीं BPSC/1993 )
उत्तर – ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसरों में वृद्धि करने हेतु विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के चलाए गए हैंअंतर्गत अनेक प्रभावकारी कार्यक्रम चलाये गए है –
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) अथवा राष्ट्रीय ग्रामीण जीविका मिशन (NRLM)
स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना 1999 में प्रारंभ किया गया जिसे अब एक सर्वव्यापक कार्यक्रम के रूप में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (NRLM) नाम से पुनर्गठित किया गया है। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्र में भारी संख्या में सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना करना है। इस योजना के प्रमुख बिन्दु हैं
1. इस योजना के अंतर्गत सहायता प्राप्त प्रत्येक परिवार को एक निश्चित अवधि (3 वर्ष) में गरीबी रेखा से ऊपर उठाना है।
2. इस योजना के दो प्रमुख घटक हैं- (a) ‘Activity Clusters’, (b) ‘Group Approach’
(a) Activity Clusters का संबंध प्रत्येक विकास खंड पर चार या पांच मुख्य ऐसी गतिविधियों का चयन पंचायत समितियों द्वारा करने का प्रावधान है जो स्थानीय संसाधनों, शिल्प और विपणन उपलब्धता के अनुरूप हों, ताकि स्वरोजगार अपने विनियोग से लाभकारी आय प्राप्त कर सकें।
(b) Group Approach का संबंध गरीबों को संगठित करके स्वयं सहायता समूह (Self Help Group) का निर्माण करना है।
3. यह योजना एक ऋण एवं सब्सिडी योजना है।
4. गरीब महिलाओं को सूक्ष्म वित्त (Micro Finance) की सुविधा उपलब्ध कराने के लिए राष्ट्रीय महिला कोष प्रभावशाली कार्य कर रहा है।
रोजगार आश्वासन योजना (EAS): यह योजना 2 अक्टूबर, 1993 ग्रामीण क्षेत्रों के 257 जिलों के 1778 विकास खंडों में प्रारंभ की गई। 1997-98 से इसे संपूर्ण देश में चलाया जा रहा है। इसमें मजदूरों के पलायन से ग्रस्त इलाकों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। इस योजना के प्रमुख बिन्दु –
1. गरीबी रेखा से नीचे रह रहे जरूरतमंद प्रत्येक परिवार से अधिकतम दो युवाओं को 100 दिन तक का लाभप्रद रोजगार उपलब्ध कराना है। योजना का गौण उद्देश्य आर्थिक अधोरचना एवं परिसंपत्तियों का सृजन करना है ।
2. योजना में मजदूरी – सामग्री के 60:40 अनुपात को बनाए रखना है।
जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) : इसे 1 अप्रैल, 1999 को प्रारंभ किया गया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में बेरोजगारी एवं अल्प – बेरोजगारी को दूर करने के लिए लाभकारी रोजगार अवसरों का सृजन करना है।
सम्पूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY): इसका प्रारंभ 25 सितंबर, 2001 को रोजगार आश्वासन योजना (EAS) और जवाहर ।
ग्राम समृद्धि योजना (JGSY) को मिलाकर किया गया। काम के बदले अनाज योजना को भी इसमें मिला दिया गया। इस योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अतिरिक्त एवं सुनिश्चित अवसर उपलब्ध कराने के साथ-साथ खाद्यान्न उपलब्ध कराना भी था। इसमें लाभार्थियों को न्यूनतम 5 किलो अनाज और कम-से-कम 25% मजदूरी नकद दी जाती थी।
काम के बदले अनाज योजनाः इसका शुभारंभ 14 नवंबर, 2004 को देश के 150 सर्वाधिक पिछड़े जिलों में इस उद्देश्य से किया गया कि पूरक वेतन से रोजगार सृजन को बढ़ाया जा सके। इसके अंतर्गत मुख्यतः जल संरक्षण, सूखे से सुरक्षा और भूमि विकास संबंधी कार्य संपन्न कराये जाते हैं और मजदूरी के न्यूनतम 25% भाग का भुगतान नकद राशि में किया जाता है। शेष मजदूरी अनाज के रूप में की जाती है। इस कार्यक्रम को अब MNREGA में शामिल कर दिया गया है।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना (MNREGA): इस महत्वाकांक्षी योजना का शुभारंभ 2 फरवरी, 2006 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले से किया गया । वर्तमान में यह देश के सभी राज्यों एवं जिलों में चलाई जा रही है। इस योजना ने ग्रामीण बेरोजगारों को सीधे फायदा पहुंचाया है। इसमें आबंटित राशि में बढ़ोतरी हो रही है जिससे जहां प्रत्यक्षतः लोगों को रोजगार मिल रहा है, वहीं अवसंरचनात्मक विकास के कारण ग्राम्य जीवन स्तर तथा कृषि को भी फायदा मिल रहा है। इसके तहत गांवों में सड़क, बांध, तालाब, नहर आदि बनाए जा रहे हैं। यह अब तक की सभी योजनाओं में सर्वप्रमुख एवं व्यापक असर वाली रही है। इसने ग्राम्य भारत की दशा और दिशा बदल कर रख दी है। इन प्रमुख योजनाओं के अलावा भी विभिन्न पंचवर्षीय योजनाओं के तहत रोजगार सृजन से संबंधित अनेक कार्य किए गए हैं
• रोजगार सृजन से संबंधित प्रमुख कार्यक्रम –
•  स्वर्ण जयंती ग्राम स्वरोजगार योजना (SGSY) अथवा राष्ट्रीय ग्रामीण जीविका मिशन (NRLM)
 > प्रारंभ 1999 –
> उद्देश्य – ग्रामीण क्षेत्रों में सूक्ष्म उद्योगों की स्थापना, स्वयं सहायता समूह बनाने के लिए प्रेरित करना।
•  रोजगार आश्वासन योजना (EAS) 
> प्रारंभ 2 अक्टूबर, 1993.
> उद्देश्य – ग्राम्य क्षेत्रों में अकुशल श्रमिकों को रोजगार प्रदान करना, ग्रामीण अधोरचना का निर्माण।
• जवाहर ग्राम समृद्धि योजना (JGSY)
> प्रारंभ 1 अप्रैल, 1999
> उद्देश्य – रोजगार अवसरों का सृजन।
• संपूर्ण ग्रामीण रोजगार योजना (SGRY)
> प्रारंभ – 25 सितंबर,  2001
> उद्देश्य – रोजगार उपलब्ध कराना ।
मजदूरी के रूप में कुछ 5 किग्रा. अनाज और 25% मजदूरी का नकद भुगतान।
• काम के बदले अनाज योजना
>  प्रारंभ – 14 नवंबर, 2004
> उद्देश्य – जल संरक्षण, सूखे से सुरक्षा, भूमि विकास संबंधी कार्य ।
> मजदूरी का न्यूनतम 25% – नकद शेष अनाज द्वारा भुगतान ।
• MNREGA –
उद्देश्य – न्यूनतम 100 दिनों के रोजगार की उपलब्धता एवं ग्रामीण अवसंरचना का विकास ।
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