वर्तमान सरकार विभिन्न राज्यों में स्मार्ट शहर विकसित करने के लिए प्रयासरत है। स्मार्ट शहरों के बारे में आपकी क्या परिकल्पनाएं हैं? आदर्श स्मार्ट शहर के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका की व्याख्या कीजिए।

वर्तमान सरकार विभिन्न राज्यों में स्मार्ट शहर विकसित करने के लिए प्रयासरत है। स्मार्ट शहरों के बारे में आपकी क्या परिकल्पनाएं हैं? आदर्श स्मार्ट शहर के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका की व्याख्या कीजिए।

अथवा
स्मार्ट सिटी मिशन का उल्लेख करें 
अथवा
इसके उद्देश्यों को स्पष्ट करें 
अथवा
स्मार्ट शहरों के बारे में अपनी परिकल्पनाएं (विचार) का उल्लेख करें।
अथवा
आदर्श स्मार्ट शहर के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका की चर्चा करें।
उत्तर – स्मार्ट शहर एक ऐसा शहरी क्षेत्र है, जोकि अत्याधुनिक एवं टिकाऊ बुनियादी ढाँचे, अचल सम्पत्ति, संचार और बाजार व्यवहार्यता के मामले में उन्नत होता है। स्मार्ट शहर में शहर सूचना प्रौद्योगिकी सिद्धान्त के बुनियादी ढांचे एवं आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति पर निर्भर होता है। एक आदर्श स्मार्ट शहर में पर्याप्त पानी की आपूर्ति, निश्चित विद्युत की आपूर्ति, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन सहित स्वच्छता, कुशल शहरी गतिशीलता और सार्वजनिक परिवहन, किफायती आवास, विशेष रूप से गरीबों के लिए सुदृढ़ आई.टी. कनेक्टिविटी और डिजिटलीकरण, सुशासन, विशेष रूप से ई-गवर्नेश और नागरिक भागीदारी, टिकाऊ पर्यावरण, नागरिकों की सुरक्षा एवं संरक्षा तथा विशेष रूप से महिलाओं, बच्चों एवं बुजुर्गों की सुरक्षा और स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं का होना आवश्यक है।
इन्हीं सब सुविधाओं का प्रायोजन एवं व्यवस्था कर भारत सरकार स्मार्ट शहर विकसित करने के लिए प्रयासरत है। इस उद्देश्य को ध्यान में रखते रखते हुए सरकार ने 2015 में स्मार्ट सिटी मिशन की शुरुआत की है जिसका उद्देश्य 2022 तक 100 शहरों को स्मार्ट शहरों के रूप में परिवर्तित करना है। सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि ऐसा पहली बार हुआ है कि शहरी विकास मंत्रालय कार्यक्रम में निधियन के लिए एवं शहरों का चयन करने के लिए चुनौती अथवा प्रतिस्पर्धा विधि का उपयोग कर रहा है । तथा साथ ही क्षेत्र आधारित विकास की कार्यनीति का उपयोग कर रहा है। यह ‘प्रतिस्पर्धा और सहकारी संघवाद’ के भाव को दर्शाता है।
•   स्मार्ट शहरों की प्रासंगिकता
शहर वर्तमान में विकास के इंजन के रूप में जाने जाते हैं। शहर सकल घरेलू उत्पाद में 60% योगदान करते हैं। अनियोजित शहरी फैलाव और मलिन बस्तियों की बदतर स्थिति तथा सेवा, अवैध निर्माण के बावजूद शहरीकरण का आर्थिक महत्व है। इसने शहरों को अत्यधिक प्रदूषित, अस्वास्थ्यकर और प्राकृतिक व जैविक सभी रूपों से असुरक्षित किया है। विफल क्षेत्रीय योजना ने हर साल लाखों लोगों का पलायन, पहले से चरमराई हुई आधारभूत संरचना और सेवा पर बोझ पैदा कर दिया है। 2050 तक 50% आबादी शहर में रहेगी जिसे समायोजित करने के लिए 500 नये शहरों की आवश्यकता है। अतः शहरीकरण की चुनौतियों पर अगर ध्यान नहीं दिया जाए तो जिस सपने से लोग शहरों की तरफ भाग रहे हैं, वह एक बेहद दुःखदायी सपना हो जाएगा।
इस प्रकार स्मार्ट शहर योजना शहरीकरण की समस्या को एक स्मार्ट समाधान प्रदान करती है। यह योजना शहरों में बुनियादी सुविधाओं एवं आधारभूत संरचना को साफ सभ्य और टिकाऊपन प्रदान करता है ।
आज शहरीकरण और इससे उत्पन्न समस्या देश के लिए बड़ी चुनौती है। शहरों की आबादी लगातार बढ़ती जा रही है। जिसके कारण आवास, परिवहन, पेयजल आपूर्ति सम्बंधी समस्याएं उत्पन्न होती हैं। ऐसे में स्मार्ट शहर (Smart City) जैसी पहल अत्यन्त उपयोगी एवं सार्थक हो सकती है। इसके प्रावधान के अलावा हमें कुछ जरूरी मसलों की तरफ भी ध्यान देने की आवश्यकता है। शहरी अवसंरचना स्मार्ट शहर विकास की एक बड़ी चुनौती है। अगले 5 वर्षों के दौरान (2017-2022) इन निर्धारित शहरों को विश्वस्तरीय अवसंरचना और अच्छा वातावरण देने के लिए 3 लाख करोड़ रुपये खर्च किये जायेंगे। जिसके लिए आई.टी. सम्पर्क एवं ई-गवर्नेस जैसे प्रौद्योगिकियों के जरिये बुनियादी सुविधाओं और नागरिक भागीदारी को सुनिश्चित कर स्मार्ट शहरों का विकास किया जा सकता है।
• स्मार्ट शहर के विकास में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की भूमिका
> स्मार्ट शहर के नगर संरचना का डिजाइन बनाने में भवन प्रौद्योगिकी का सहारा लिया जा सकता है। इस प्रौद्योगिकी की सहायता से ऐसे भवन का निर्माण किया जा सकता है जो ऊर्जा दक्ष एवं ध्वनि सह हों ।
> विज्ञान प्रोद्योगिकी की सहायता से सार्वजनिक भवनों की छतों पर सौर ऊर्जा से संबंधित संयंत्र लगाए जा सकते हैं, ऐसे संयंत्र उस भवन की समस्त ऊर्जा की आवश्यकता को पूर्ण कर सकते हैं।
> प्रौद्योगिकी की सहायता से नगरीय ड्रेनेज को दुरुस्त किया जा सकता है। साथ ही वर्षा जल संचय द्वारा जल की आवश्यकता की पूर्ति भी हो सकती है।
> विज्ञान प्रौद्योगिकी द्वारा सार्वजनिक वाहनों को प्रदूषण मुक्त बनाया जा सकता है। जैसे बैटरी रिक्शा या सौर रिक्शा का विकास। प्रौद्योगिकी के द्वारा स्मार्ट शहरों में भूमिगत या ऊपरी मेट्रों लाइनों का विकास किया जा सकता है।
> स्मार्ट शहरों में वायु को प्रदूषण मुक्त करने के लिए धूल एवं धुआं सोखने वाले यंत्र को स्थापित किया जा सकता है।
> स्मार्ट शहरों में लोगों की सुरक्षा हेतु सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाया जा सकता है। पुलिस बल को जीपीएस के माध्यम से जोड़ कर पुलिस को और अधिक दक्ष बनाया जा सकता है।
उदाहरण के तौर पर देखा जाए तो दिल्ली जैसे शहर में ई-रिक्शा जैसे प्रौद्योगिकी की शुरुआत ने अच्छी पहल की है। इसके साथ-साथ दिल्ली एवं मुम्बई मेट्रो ने भी भारी मात्रा में परिवहन एवं प्रदूषण के क्षेत्र में मदद किया है।
 अतः कहा जा सकता है कि स्मार्ट शहर विकास की पहल में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी का प्रयोग कर इस विकास क्रम को बहुत ही सुसंगठित एवं समायोजित तरीके से लागू किया जा सकता है। जिससे कि स्मार्ट सिटी का स्मार्ट समाधान हो सके।
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