सन् 1977 से बिहार की राजनीति में जाति विषय पर एक संक्षिप्त एवं आलोचनात्मक निबंध लिखिये और उन कारणों पर विशेष रूप से प्रकाश डालिए जो वर्तमान स्थिति के लिए उत्तरदायी हैं।

सन् 1977 से बिहार की राजनीति में जाति विषय पर एक संक्षिप्त एवं आलोचनात्मक निबंध लिखिये और उन कारणों पर विशेष रूप से प्रकाश डालिए जो वर्तमान स्थिति के लिए उत्तरदायी हैं। अथवा भारत में 1977 के बाद राजनीति में क्षेत्रीय दलों का प्रभाव बढ़ा है जो मूलतः जाति आधारित राजनीति करते हैं, की व्याख्या … Read more

“भारत एक उदारवादी लोकतांत्रिक राज्य है।” (टिप्पणी- 200 शब्दों में)

“भारत एक उदारवादी लोकतांत्रिक राज्य है।” (टिप्पणी- 200 शब्दों में) अथवा भारतीय लोकतंत्र के उदारवादी पक्ष पर जोर डालते हुए इसके विभिन्न लक्षणों को उदाहरणों से स्पष्ट करें। उत्तर – देश की विशालता एवं जाति धर्म, क्षेत्र आदि के आधार पर विविधताओं के कारण हमारे द्वारा 26 जनवरी, 1950 को स्थापित लोकतांत्रिक राज्य अनेक उदारवादी … Read more

संपत्ति के अधिकार के वर्तमान स्वरूप का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए ।

संपत्ति के अधिकार के वर्तमान स्वरूप का आलोचनात्मक मूल्यांकन कीजिए । अथवा संपत्ति के अधिकार का वर्तमान स्वरूप अर्थात् अनुच्छेद 300 (a) का वर्तमान संदर्भ में मूल्यांकन करें। उत्तर- प्रारंभ में संविधान में संपत्ति अर्जन, स्वामित्व और संरक्षण का मौलिक अधिकार दिया गया था तथा इसे अनुच्छेद 19 (f) तथा अनुच्छेद 31के अंतर्गत रखा गया … Read more

भारतीय लोकतंत्र में उभरती प्रवृत्तियों का विश्लेषण कीजिए।

भारतीय लोकतंत्र में उभरती प्रवृत्तियों का विश्लेषण कीजिए। अथवा भारतीय लोकतंत्र में उभरती सकारात्मक प्रवृत्तियों पर फोकस करते हुए इनका विश्लेषण करें। उत्तर – भारतीय लोकतंत्र की स्थापना 26 जनवरी, 1950 को संविधान लागू होने के साथ ही हो गयी। स्वतंत्रता के अनेक दशक के बाद अब भारतीय लोकतंत्र में परिपक्वता के गुण देखे जा … Read more

बिहार में चुनाव प्रक्रिया – ( टिप्पणी- 200 शब्दों में )

बिहार में चुनाव प्रक्रिया – ( टिप्पणी- 200 शब्दों में ) उत्तर – भारत विगत कुछ अन्य राज्यों के तरह ही बिहार में स्वच्छ एवं निष्पक्ष चुनाव करवाने का उत्तरदायित्व चुनाव आयोग का है। वषों से संसद तथा विधानसभा के चुनावों को निर्वाचन आयोग ने सफलतापूर्वक संपन्न करवाया है। यद्यपि विगत वर्षों के परिणामों को … Read more

भारत की वर्ग रचना में जाति की क्या भूमिका है?

भारत की वर्ग रचना में जाति की क्या भूमिका है? अथवा भारतीय उच्च, मध्यम एवं निम्न वर्गों में सामान्यतया जातियों की उपस्थिति दर्शाते हुए आधुनिक समाज में जाति आधारित वर्ग संरचना का टूटना दिखाते लिखें। उत्तर- भारत की वर्ग रचना में जाति का महत्वपूर्ण योगदान है। सामान्यतः ‘वर्ग’ जाति आधारित ही हैं। ग्रामीण भारत में … Read more

टिप्पणी (प्रत्येक 200 शब्दों में ) – (i) भारत में क्षेत्रीयतावाद (ii) पोटा

टिप्पणी (प्रत्येक 200 शब्दों में ) – (i) भारत में क्षेत्रीयतावाद (ii) पोटा अथवा क्षेत्रीयतावाद को समझाते हुए इसके व्यापक नकारात्मक पक्ष एवं प्रभाव को दिखाएं। उत्तर -(i) भारत में क्षेत्रीयतावाद भाषा, धर्म, जाति आदि के आधार पर अपने क्षेत्र के प्रति विशेष लगाव तथा दूसरे क्षेत्र को अपने से अलग समझने की प्रवृत्ति जिससे … Read more

भारत में साम्प्रदायिकता पर नोट लिखें। विरोधी दल भाजपा को साम्प्रदायिक दल कहकर क्यों संबोधित करते हैं?

भारत में साम्प्रदायिकता पर नोट लिखें। विरोधी दल भाजपा को साम्प्रदायिक दल कहकर क्यों संबोधित करते हैं? अथवा ‘साम्प्रदायिकता’ को समझाते हुए इसके व्यापक नकारात्मक पक्ष एवं प्रभाव को दिखाएं। भाजपा की स्थिति स्पष्ट करें। उत्तर- अपने संप्रदाय अथवा धर्म की श्रेष्ठता के उन्माद में दूसरे संप्रदाय / धर्म से घृणा अथवा द्वेष रखना तथा … Read more

राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति का वर्णन करें। बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री की शक्तियों, कार्यों तथा उपलब्धियों का वर्णन करें।

राज्य के मुख्यमंत्री की नियुक्ति का वर्णन करें। बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री की शक्तियों, कार्यों तथा उपलब्धियों का वर्णन करें। अथवा मुख्यमंत्री की नियुक्ति-प्रक्रिया का संक्षिप्त वर्णन एवं वर्तमान मुख्यमंत्री की शक्तियों एवं कार्यों को फोकस करें। उत्तर- संविधान के अनुसार राज्यपाल की सहायता के लिए एक मंत्रिपरिषद होगी जिसका प्रधान मुख्यमंत्री होगा। संविधान के … Read more

‘न्यायिक सक्रियता’- अर्थ एवं मूल्यांकन (टिप्पणी- 200 शब्दों में)

‘न्यायिक सक्रियता’- अर्थ एवं मूल्यांकन (टिप्पणी- 200 शब्दों में) अथवा न्यायिक सक्रियता के अर्थ, मूल उद्देश्य, इसकी आवश्यकता फायदे तथा इससे न्यायपालिका एवं कार्यपालिका के मध्य टकराव की स्थिति का उल्लेख करें । उत्तर – संसदीय लोकतंत्र में विधायिका, कार्यपालिका तथा न्यायपालिका के अपने कार्य तथा क्षेत्र निश्चित हैं परंतु विगत कुछ वर्षों से विधायिका … Read more