गीत अगीत : एक समीक्षा

गीत अगीत : एक समीक्षा रामधारी सिंह दिनकर की कविता में यदि एक ओर वीरता का आज है तो दूसरी तरफ शृंगार का माधुर्य भी है। एक ओर ‘कुरूक्षेत्र’ में ‘हुंकार’ की रणभेड़ी बजती है तो दूसरी ओर प्रेम के लुभावने गीत गाये जाते हैं। ऐसे ही गीतों में एक गीत है, ‘गीत- अगीत’। यह … Read more

व्याल पर विजय : अर्थ एवं व्याख्या

व्याल पर विजय : अर्थ एवं व्याख्या व्याल पर विजय : अर्थ एवं व्याख्या ‘व्याल पर विजय’ कविता दिनकर की इतिवृत्तात्मक कविता है। इसमें कवि ने बालक कृष्ण के जीवन से जुड़ी एक रोचक कथा का सहारा लिया है। कृष्ण द्वारा कालिया नाग वद्य की मिथकीय कथा को कवि ने काव्यात्मक अभिव्यक्ति प्रदान की है। … Read more

मनुज का श्रेय : कथावस्तु एवं काव्य-सौंदर्य

मनुज का श्रेय : कथावस्तु एवं काव्य-सौंदर्य विज्ञान की सारी शक्ति और संभावनाओं से पूर्ण परिचित होने के बाबजूद दिनकर विज्ञान के समाज और साहित्य विरोधी रूप से चितित थे। दुष्यंत कुमार से हुए एक बातचीत में उन्होंने साफ कहा, “यह तय है कि अगर कविता विज्ञान का पूरा अनुकरण करेगी तो विज्ञान बच रहेगा, … Read more

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : संक्षिप्त जीवनी

रामधारी सिंह ‘दिनकर’ : संक्षिप्त जीवनी अपनी कविता से ‘हुंकार’ भरनेवाले कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर’ का जन्म 23 सितम्बर 1908 को बेगूसराय जिला के अंतर्गत सिमरिया घाट नामक ग्राम में हुआ था। वे अपने पिता रवि सिंह के मंझले बेटे थे। दिनकर जब अल्प-व्यस्क थे तभी उनके ऊपर से पिता की छाया हट गयो। ज्येष्ठ … Read more

गर्म पकौडी : अर्थ एवं व्याख्या

गर्म पकौडी : अर्थ एवं व्याख्या कविता में व्यंग्य का पैनापन निराला का वैशिष्ट्य है। कबीर के बाद निराला हिंदी के बड़े व्यंग्यकार-कवि के रूप में जाने जाते हैं। समकालीन राजनीतिक-सामाजिक परिदृश्य पर चुभने वाली शैली में व्यंग्य उत्पन्न करने में निराला की सफलता का प्रमाण है – गर्म पकौड़ी’। कविता की संज्ञा ही पारंपरिक … Read more

राम की शक्तिपूजा : शिल्प विधान

राम की शक्तिपूजा : शिल्प विधान राम की शक्तिपूजा : शिल्प विधान ‘राम की शक्तिपूजा’ में जहाँ विधागत विविधता है वहीं इसका संरचनात्मक सौंदर्य भी अनूठा है। एक नाटकीय रचना होने के कारण इसमें वर्णन-कौशल, नाद-सौंदर्य, भावानुकूल भाषानुकूल भाषा-प्रयोग और पात्रों का जीवन-कर्म कौशल या गतिमान चाक्षुस बिंबों का समावेश देखने को मिलता है। इस … Read more

राम की शक्तिपूजा : कथावस्तु

राम की शक्तिपूजा : कथावस्तु राम की शक्तिपूजा : कथावस्तु ‘राम की शक्तिपूजा’ की सामग्री निराला ने वस्तुत: बंगाल के ही एक मध्युगीन कवि कृतिवास की ‘रामायण’ से ली है, जो अनुमानतः तुलसीदास के सौ वर्ष पहले हुए थे। यह कविता सन् 1936 में लिखी गई। कविता कथात्मक ढंग से शुरू होती है और इसमें … Read more

कुकुरमुत्ता : नयी काव्य दृष्टि और प्रयोगशीलता

कुकुरमुत्ता : नयी काव्य दृष्टि और प्रयोगशीलता कुकुरमुत्ता : नयी काव्य दृष्टि और प्रयोगशीलता संपूर्ण हिंदी साहित्य में निराला सर्वाधिक प्रयोगशील कवि के रूप में सामने आते हैं। वे छायावादी कविता के दौर में छायावादी कविता लिखते हुए उसका अतिक्रमण कर ‘कुकुरमुत्ता’ सदृश कविता की रचना करते हैं। डा0 दूधनाथ सिंह ने उदाहरण देकर यह … Read more

तोड़ती पत्थर : भाव पक्ष एवं संरचना शिल्प

तोड़ती पत्थर : भाव पक्ष एवं संरचना शिल्प तोड़ती पत्थर : भाव पक्ष एवं संरचना शिल्प परिमल में संकलित ‘तोड़ती पत्थर’ निराला की उत्कृष्ट प्रगीतात्मक रचना है। प्रगीत में चिलचिलाती दोपहरी में सड़क के किनारे पत्थर तोड़ती एक युवा मजदूरिन का क्रांतिकारी आशयों और संकेतों से भरा वस्तुपरक यथार्थवादी अंकन है। रेखाचित्र के विषयनिष्ठ वस्तुपरक … Read more

जागो फिर एक बार : भाव पक्ष एवं कला पक्ष

जागो फिर एक बार : भाव पक्ष एवं कला पक्ष पूर्व में छायावादी कविता पर एक आरोप यह लगाया जाता था कि जब समूचा देश आजादी की जंग में प्राण-पण से लगा हुआ था छायावादी कवि प्रकृति के रम्य वर्णन में मशगूल थे। सर्वप्रथम आलोचक प्रवर नन्द दुलारे वाजपेयी तथा बाद में प्रो0 नामवर सिंह … Read more