गीत अगीत : एक समीक्षा
गीत अगीत : एक समीक्षा रामधारी सिंह दिनकर की कविता में यदि एक ओर वीरता का आज है तो दूसरी तरफ शृंगार का माधुर्य भी है। एक ओर ‘कुरूक्षेत्र’ में ‘हुंकार’ की रणभेड़ी बजती है तो दूसरी ओर प्रेम के लुभावने गीत गाये जाते हैं। ऐसे ही गीतों में एक गीत है, ‘गीत- अगीत’। यह … Read more