पल्लवन अथवा भाव-विस्तारण

पल्लवन अथवा भाव-विस्तारण किसी संक्षिप्त कथन का विस्तारपूर्वक सही अर्थ लिखना ही विस्तारण या पल्लवन है। बेइन के अनुसार किसी विचार को ‘अनुच्छेद में पल्लवित करने का एक विशिष्ट उद्देश्य होता है तथा कार्य में अप्रासंगिकता एवं विषयांतरण का अभाव होना चाहिए। विस्तारण को पल्लवन भी कहते हैं। किसी लोकोक्ति, भावपूर्ण वाक्य, नीति-वचन अथवा सूक्ति … Read more

भारत का उपग्रह प्रक्षेपण विकास कार्यक्रम (Satellite Launch Development Programme of India)

भारत का उपग्रह प्रक्षेपण विकास कार्यक्रम (Satellite Launch Development Programme of India) भारत में प्रक्षेपण यानों के विकास के कार्यक्रम की शुरुआत 1970 के दशक के प्रारंभ में हुई। प्रथम प्रायोगिक प्रक्षेपण यान ‘एसएलवी-3’ को वर्ष 1979 में प्रक्षेपित किया गया। इसके एक संवर्धित संस्करण, एएसएलवी-डी3 का प्रमोचन 1992 में सफलतापूर्वक किया गया। उपग्रह प्रक्षेपण … Read more

संक्षेपण का अर्थ एवं परिभाषा

संक्षेपण का अर्थ एवं परिभाषा किसी विस्तृत विवरण, विस्तृत आख्या, वक्तव्य, प्रतिवेदन पत्र व्यवहार तथा लेख आदि के तथ्यों एवं निर्देशों का सुनियोजित सुरूचिपूर्ण संयोजन और समस्त अनिवार्य, उपयोगी तथा मूल तथ्यों का प्रभावपूर्ण संक्षिप्त संकलन संक्षेपण कहलाता है। इसे संक्षिप्त- लेखन, सारांश । सार-लेखन, संक्षिप्तीकरण भी कहा जाता है। संक्षेपण में अप्रासंगिक, असम्बद्ध, पुनरावृत्ति … Read more

भवानी प्रसाद मिश्र

भवानी प्रसाद मिश्र 1. है गीत बेचना वैसे बिल्कुल पाप  क्या करूँ, मगर लाचार हारकर गीत बेचता हूँ। जी हाँ, हुजूर मैं गीत बेचता हूँ।  भवानी प्रसाद मिश्र हिंदी के वरिष्ठ और गंभीर कवि के रूप में जाने जाते हैं। गीत-फरोश उनकी अत्यंत प्रसिद्ध और महत्वपूर्ण कविता है। । इस कविता में दीनता के कारण … Read more

प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी (Launch Vehicle Technology)

प्रक्षेपण यान प्रौद्योगिकी (Launch Vehicle Technology) उपग्रहों को उनकी कक्षा में स्थापित करने के लिये रॉकेट/उपग्रह प्रक्षेपण यान की आवश्यकता होती है। यह यान तेज़ गति से यात्रा करके पूर्व निर्धारित कक्षा में उपग्रह को स्थापित कर देता है। प्रक्षेपण यान न्यूटन की गति के तीसरे नियम के आधार पर काम करते हैं। प्रक्षेपण यान … Read more

हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन 1. लाल सुरा की धार लपट-सी कह न इसे देना ज्वाला,  फेनिल मदिरा है मत इसको कह देना उर का छाला,  दर्द नशा है इस मदिरा का विगत स्मृतियाँ साकी हैं ?  पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला ।। हिंदी साहित्य में जो चंद रचनाएं अत्यंत लोकप्रिय हुई हैं उनमें … Read more

महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा 1. विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात !  वेदना में जन्म करुणा में मिला आवास, अश्रु चुनता दिवस इसका अश्रु गिनती रात ! जीवन विरह का जलजात ! छायावादी कवयित्री शीर्षक गीत से गृहीत है। यहाँ महादेवी की कविता करुणा की महागाथा है। व्याख्येय काव्यांश महादेवी वर्मा रचित ‘विरह का जलजात जीवन’ … Read more

सुमित्रानन्दन पंत

सुमित्रानन्दन पंत  प्रथम रश्मि का आना रंगिणी, तूने कैसे पहचाना ?  कहाँ, कहाँ है बाल-विहंगिनी। पाया तूने यह गाना ? सुमित्रानन्दन पंत छायावाद के सर्वाधिक सुकमार कवि के रूप में जाने जाते हैं। प्रकृति की गोद में पले-बढ़े पंत की कविताओं में प्रकृति अपने विविध रंगों के साथ रच-पच कर आती है। पंत का काव्य … Read more

धर्मवीर भारती : एक परिचय

धर्मवीर भारती : एक परिचय  धर्मवीर भारती का बचपन बहुत ही दारूण गरीबी में बीता। उनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। सन् 1942 के आंदोलन में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। फलस्वरूप एक वर्ष तक पढ़ाई रूक गई। — एम.ए. की पढ़ाई करते समय भारती ‘अभ्युदय’ पत्रिका से जुड़ गए। सन् 1948 में ‘संगक’ नाम … Read more

वेदना और कल्पना : भाव-सौंदर्य एवं शिल्प-सौंदर्य

वेदना और कल्पना : भाव-सौंदर्य एवं शिल्प-सौंदर्य प्रगतिवाद और नयी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर गजानन माधव मुक्तिबोध की आरंभिक कविताओं में छायावाद का प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित होता है। वैसे बाद में मुक्तिबोध छायावादी भावुकता के विरूद्ध ठोस यथार्थ की कविताएं लिखने लगे। लेकिन ‘वेदना और कल्पना’ में छायावादी रूझान से इंकार नहीं किया जा सकता … Read more