हिन्दी साहित्य में गीतिकाव्य परम्परा-उद्भव और विकास

हिन्दी साहित्य में गीतिकाव्य परम्परा-उद्भव और विकास जब मानव के व्यक्तिगत अनुभव, भावावेश में संगीतमय होकर कोमलकांत पदावली के  माध्यम से अभिव्यक्त होते हैं, उन्हें गीत कहते हैं। भारतीय समस्त साहित्य ही गेय होता था, इसीलिए  गीतिकाव्य का भारतीय साहित्य में कोई पृथक् अस्तित्व नहीं रहा । जैसा कि अंग्रेजी में गीति को ‘लिरिक’ कहते … Read more

राष्ट्र-निर्माण में साहित्य का महत्व और प्राण से नहीं कर शरीर के महत्व

राष्ट्र-निर्माण में साहित्य का महत्व और प्राण से नहीं कर शरीर के महत्व जिस प्रकार शब्द से अर्थ को और अर्थ से शब्द को तथा शरीर से प्राण को शरीर को पृथक् नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार हम राष्ट्र को भी साहित्य से पृथक् सकते और न साहित्य को राष्ट्र से । जिस प्रकार … Read more

हिन्दी काव्य में प्रकृति चित्रण

हिन्दी काव्य में प्रकृति चित्रण प्रकृति चित्रण प्रकृति मानव की चिरसंगिनी रही है। अपने दैनिक जीवन के कृत्यों से उसका जब-जब मन ऊबा, तब तब उसने प्रकृति का आश्रय लिया । उसने अनुभव किया कि प्रकृति उसके दुःख में दुःखी और सुख में सुखी है। आकाश, सूर्य, तारागण, समुद्र, मेघ, बिजली, द्रुमलतायें, पशु-पक्षी, ऊषा की … Read more

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल अथवा हिन्दी में वैज्ञानिक समालोचना के जन्मदाता

आचार्य रामचन्द्र शुक्ल अथवा हिन्दी में वैज्ञानिक समालोचना के जन्मदाता आपके प्रिय निबन्धकार की शैलीगत विशेषतायें अथवा मेरा प्रिय लेखक- आचार्य रामचन्द्र शुक्ल अथवा हिन्दी में वैज्ञानिक समालोचना के जन्मदाता – मेरा प्रिय लेखक निबन्धकार एवं हिन्दी में वैज्ञानिक समालोचना के जन्मदाता आचार्य रामचन्द्र शुक्ल जी हैं। शुक्ल जी हिन्दी के अद्भुत समालोचक, उच्चकोटि के … Read more

बिहारी के काव्य में गागर में सागर भरा हुआ है

बिहारी के काव्य में गागर में सागर भरा हुआ है मेरा प्रिय कवि अथवा “बिहारी के काव्य में गागर में सागर भरा हुआ है” आविर्भाव का समय – अपने-अपने मन की बात है। किसी को मीठा अच्छा लगता और किसी को खट्टा और नमकीन । किसी को फीका दूध अच्छा लगता है तो किसी को … Read more

साहित्य समाज का दर्पण है | साहित्य अपने समय का प्रतिबिम्ब होता है

साहित्य समाज का दर्पण है | साहित्य अपने समय का प्रतिबिम्ब होता है  “साहित्य समाज का दर्पण है” अथवा “साहित्य अपने व्यापक अर्थ में समाज के गूँगे इतिहास का मुखर सहोदर है” अथवा “साहित्य अपने समय का प्रतिबिम्ब होता है “ “हितने सहितम्, सहितम्, साहितस्य भावः साहित्यम्” इस विग्रह के अनुसार साहित्य का शाब्दिक अर्थ … Read more

अनुवाद परिभाषा एवं अर्थ

अनुवाद परिभाषा एवं अर्थ अनुवाद का व्युत्पत्तिपरक अर्थ होता है – अनु + वाद । अनु का अर्थ होता है ‘ पीछे’ और वाद का अर्थ होता है ‘कहना’। इस प्रकार अनुवाद का अर्थ हुआ किसी बात के कहने के बाद कोई बात कहना अर्थात् पुनर्कथन। दूसरे शब्दों में, किसी भाषा के कथ्य को दूसरी … Read more

प्रारूपण : अर्थ एवं परिभाषा

प्रारूपण : अर्थ एवं परिभाषा कार्यालयी हिंदी में प्रारूपण को ‘पत्राचार / मसौदा – लेखन / आलेखन / प्रलेखन नाम से भी जाना जाता है। प्रारूपण कार्यालयी हिंदी का दूसरा महत्त्वपूर्ण अंग है। ‘प्रारूपण’ का अर्थ है- — पत्र का कच्चा अथवा अंतिम रूप । किसी पत्र का प्रारूप तैयार करना ही प्रारूपण कहलाता है। … Read more

पानी का शुद्धीकरण / कीटाणुशोधन (Water Purification/Disinfection)

पानी का शुद्धीकरण / कीटाणुशोधन (Water Purification/Disinfection) पानी के शुद्धीकरण का अर्थ है- प्रदूषित पानी को पीने योग्य बनाना। शोधित जल को भौतिक, रासायनिक और जीवाणुरोधी मानकों पर खरा भी उतरना चाहिये। इसमें कोई दुर्गंध नहीं होनी चाहिये और यह रासायनिक तौर पर क्रियाशील भी नहीं होना चाहिये। प्रक्रिया (Method) पानी के शुद्धीकरण की प्रक्रिया … Read more

टिप्पण: अर्थ | कार्यालय टिप्पण के प्रमुख भेद

टिप्पण: अर्थ | कार्यालय टिप्पण के प्रमुख भेद कार्यालय में बाहर से आनेवाले पत्र आदि अथवा कार्यालय के ही कर्मचारियों द्वारा दिए गए विविध प्रकार के प्रार्थना पत्रादि पर सक्षम अधिकारी को उस पर यथावश्यक निर्णय लेने में सहायता देने के उद्देश्य से उस विषय से संबंधित कार्यालय को नीति, कार्य की स्थिति तथा रीति … Read more