साहित्य समाज का दर्पण है | साहित्य अपने समय का प्रतिबिम्ब होता है
साहित्य समाज का दर्पण है | साहित्य अपने समय का प्रतिबिम्ब होता है “साहित्य समाज का दर्पण है” अथवा “साहित्य अपने व्यापक अर्थ में समाज के गूँगे इतिहास का मुखर सहोदर है” अथवा “साहित्य अपने समय का प्रतिबिम्ब होता है “ “हितने सहितम्, सहितम्, साहितस्य भावः साहित्यम्” इस विग्रह के अनुसार साहित्य का शाब्दिक अर्थ … Read more