हरिवंश राय बच्चन

हरिवंश राय बच्चन 1. लाल सुरा की धार लपट-सी कह न इसे देना ज्वाला,  फेनिल मदिरा है मत इसको कह देना उर का छाला,  दर्द नशा है इस मदिरा का विगत स्मृतियाँ साकी हैं ?  पीड़ा में आनंद जिसे हो, आए मेरी मधुशाला ।। हिंदी साहित्य में जो चंद रचनाएं अत्यंत लोकप्रिय हुई हैं उनमें … Read more

महादेवी वर्मा

महादेवी वर्मा 1. विरह का जलजात जीवन, विरह का जलजात !  वेदना में जन्म करुणा में मिला आवास, अश्रु चुनता दिवस इसका अश्रु गिनती रात ! जीवन विरह का जलजात ! छायावादी कवयित्री शीर्षक गीत से गृहीत है। यहाँ महादेवी की कविता करुणा की महागाथा है। व्याख्येय काव्यांश महादेवी वर्मा रचित ‘विरह का जलजात जीवन’ … Read more

सुमित्रानन्दन पंत

सुमित्रानन्दन पंत  प्रथम रश्मि का आना रंगिणी, तूने कैसे पहचाना ?  कहाँ, कहाँ है बाल-विहंगिनी। पाया तूने यह गाना ? सुमित्रानन्दन पंत छायावाद के सर्वाधिक सुकमार कवि के रूप में जाने जाते हैं। प्रकृति की गोद में पले-बढ़े पंत की कविताओं में प्रकृति अपने विविध रंगों के साथ रच-पच कर आती है। पंत का काव्य … Read more

धर्मवीर भारती : एक परिचय

धर्मवीर भारती : एक परिचय  धर्मवीर भारती का बचपन बहुत ही दारूण गरीबी में बीता। उनकी शिक्षा-दीक्षा इलाहाबाद में हुई। सन् 1942 के आंदोलन में उन्होंने सक्रिय रूप से हिस्सा लिया। फलस्वरूप एक वर्ष तक पढ़ाई रूक गई। — एम.ए. की पढ़ाई करते समय भारती ‘अभ्युदय’ पत्रिका से जुड़ गए। सन् 1948 में ‘संगक’ नाम … Read more

वेदना और कल्पना : भाव-सौंदर्य एवं शिल्प-सौंदर्य

वेदना और कल्पना : भाव-सौंदर्य एवं शिल्प-सौंदर्य प्रगतिवाद और नयी कविता के प्रमुख हस्ताक्षर गजानन माधव मुक्तिबोध की आरंभिक कविताओं में छायावाद का प्रभाव स्पष्ट परिलक्षित होता है। वैसे बाद में मुक्तिबोध छायावादी भावुकता के विरूद्ध ठोस यथार्थ की कविताएं लिखने लगे। लेकिन ‘वेदना और कल्पना’ में छायावादी रूझान से इंकार नहीं किया जा सकता … Read more

मुक्तिबोध : जीवन-यात्रा

मुक्तिबोध : जीवन-यात्रा मुक्तिबोध : जीवन-यात्रा गजानन माधव मुक्तिबोध का जन्म 13 नवम्बर 1917 को श्योपुर (ग्वालियर) में हुआ। मुक्तिबोध के परदादा वासुदेव जी जलगाँव (खानदेश, महाराष्ट्र) छोड़कर ग्वालियर आ बसे। मुक्तिबोध के शैशवावस्था की एक मजेदार घटना यह है कि जब वे छ: महीने के रहे होंगे, एक बंदर उन्हें झूले पर से उठा … Read more

प्रगतिवाद : अवधारणा और स्वरूप

प्रगतिवाद : अवधारणा और स्वरूप प्रगतिवाद सामाजिक यथार्थवाद के नाम पर चलाता गया वह साहित्यिक आंदोलन है जिसमें जीवन और यथार्थ के वस्तु- सत्य को उत्तर छायावाद काल में प्रश्रय मिला और जिसने सर्वप्रथम यथार्थवाद की ओर समस्त साहित्यिक चेतना को अग्रसर होन की प्रेरणा दी। प्रगतिवाद का उद्देश्य था साहित्य में उस सामाजिक यथार्थवाद … Read more

दुर्वादल : काव्य सौंदर्य

दुर्वादल : काव्य सौंदर्य सन् 1947 में नई कविता की पहली आहट की तरह अज्ञेय का कविता संग्रह ‘हरी घास पर क्षण भर’ प्रकाशित हुआ। संग्रह के फ्लैप की यह टिप्पणी गौरतलब है, ‘अज्ञेय के इस नये संग्रह में एक नयी ताजगी है। अनुभूति की कोमलता के साथ बुद्धि की ललकार भी।’ ‘दूर्वादल’ कविता इसी … Read more

अज्ञेय : कवि के रूप में

अज्ञेय : कवि के रूप में अज्ञेय : कवि के रूप में अज्ञेय का पूरा राम सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन था। इनका जन्म सन् 19।। ई0 में और मृत्यु सन् 1986 ई0 में हुआ। अज्ञेयजी ने जब कविता की भूमि पर कदम रखा, एक और तो छायावाद का लाजवंती रूप था, जिसे जीवन की धूप बर्दाश्त … Read more

नयी कविता : उद्भव, विकास और प्रवृत्तियाँ

नयी कविता : उद्भव, विकास और प्रवृत्तियाँ हिंदी साहित्य कोश के अनुसार, नयी कविता मूलत: 1953 ई0 में ‘नये पत्ते’ के प्रकाशन के साथ विकसित हुई और जगदीश गुप्त तथा रामस्वरूप चतुर्वेदी के संपादन में प्रकाशित होनेवाले संकलन ‘नयी कविता (1954) में सर्वप्रथम अपने समस्त संभावित प्रतिमानों के साथ प्रकाश में आयो। इस काल की … Read more