बिहार में समृद्ध प्राकृतिक साधनों के बावजूद औद्योगिक विकास की गति धीमी क्यों है? विवेचना कीजिए |

बिहार में समृद्ध प्राकृतिक साधनों के बावजूद औद्योगिक विकास की गति धीमी क्यों है? विवेचना कीजिए |

अथवा

समृद्ध प्राकृतिक साधन (मुख्यत: कृषि के लिए) के बावजूद औद्योगिक विकास में मंदी के विभिन्न कारणों की चर्चा करें।
उत्तर- बिहार में प्राकृतिक साधनों की प्रचुरता है। यह भारत के उपजाऊ उत्तरी मैदान का भाग है जो कृषिकार्य हेतु उत्तम मानी जाती है। यद्यपि हमारे पास खनिज संसाधनों की कमी है लेकिन मेहनती एवं कुशल मानव संसाधन ने इस कमी को पूरा किया है। यहां की कृषि एवं मानव संसाधन के समुचित उपयोग से कृषि आधारित उद्योग लगाए जा सकते हैं। साथ ही यहां की बड़ी जनसंख्या घरेलू बाजार भी उपलब्ध कराती है। बिहार की जलवायु कृषिकार्य के साथ ही कठिन श्रम करने हेतु उपयुक्त है। यहां जल संसाधनों की कमी नहीं है तथा इनका प्रयोग सिंचाई, बिजली उत्पदान, आंतरिक परिवहन, औद्योगिक एवं घरेलू उपयोग हेतु किया जा सकता है। तालाबों एवं जल-जमाव वाले क्षेत्रों में मत्स्य पालन उद्योग फायदेमंद हो सकता है। बिहार कलकत्ता बंदरगाह से नजदीक है। इसका फायदा यहां के उद्योगों को मिल सकता है। इन सबके बावजूद बिहार में औद्योगिक विकास काफी मंद है। इसके निम्नलिखित कारण हैं-
1. बिहार विभाजन के बाद औद्योगिक नगर एवं खनिज क्षेत्र झारखंड में चले गए, जबकि शेष हिस्से में मात्र कृषि का विकास भी उच्च स्तर का नहीं हो पाया है। यहां की कृषि अब भी पिछड़ी अवस्था में है।
2. यहां लघु एवं कुटीर उद्योगों की पर्याप्त संभावना है, परन्तु वित्त के अभाव में लघु-कुटीर उद्योगों का भी पर्याप्त विकास नहीं हो पाया है। इसके लिए सरकारी सहायता के साथ ही स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की आवश्यकता है।
3.  उद्योगों में दूसरे राज्यों अथवा देशों से निवेश के लिए यहां माहौल नहीं है। कानून-व्यवस्था की स्थिति पिछले कुछ वर्षों तक अत्यंत खराब थी। साथ ही उद्योगों के लिए अन्य ढांचागत सुविधाओं का अभाव है।
4. वर्तमान सरकार औद्योगिक विकास को लेकर गंभीर है परन्तु पहले की सरकारें इस मामले में ज्यादा गंभीर नहीं थीं जिसका नतीजा यह हुआ कि नए उद्योगों का अभाव, साथ ही पुराने उद्योग-धंधों का विध्वंस ।
5. उद्योग के लिए आवश्यक बिजली, कोयला आदि का बिहार में अभाव है। जल विद्युत का उत्पादन एक विकल्प हो सकता है लेकिन इसके लिए अब तक गंभीर प्रयास नहीं किए गए हैं।
6. बिहार में नक्सलवाद एवं गुण्डागर्दी अपने चरम पर है। ये तत्व औद्योगिक विकास में बाधक हैं तथा औद्योगिक विकास के खिलाफ हिंसा का सहारा लेते हैं। ये सरकारी एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाते रहते हैं। इन सबके कारण जहां नये उद्योगपति आने से डरते हैं, वहीं यहां के उद्योगपतियों का पलायन हो रहा है।
 7. यहां उद्योगों के लिए कच्चे माल की कमी है।
8. औद्योगिक विकास में बिहार की सामाजिक व्यवस्था भी बाधक है। जाति-व्यवस्था के कारण सभी को विकास करने, व्यापार करने आदि का समान अवसर उपलब्ध नहीं हो पाता । राजनीतिक दल भी जाति आधारित जीत हासिल कर विकास को किनारे कर देते हैं ।
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